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गीत 2 / बारहवां अध्याय / अंगिका गीत गीता / विजेता मुद्‍गलपुरी

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वहै ब्रह्मवेत्ता जौने जगत के काज करै
रोम-रोम, साँस-साँस कृष्ण-कृष्ण गावै छै।

गाय के दुहैत काल, धान के कुटैत काल
दही के मथैत काल कृष्ण-कृष्ण गावै छै।
आँगन निपैत काल, शिशु पिलवैत काल
झुलुआ झुलैत काल कृष्ण-कृष्ण गावै छै।
लोरी सुनवैत काल, शिशु सुतवैत काल
अँगना बोढ़ैत काल कृष्ण-कृष्ण गावै छै।
वहै ब्रह्मवेत्ता जौने जगत के काज करै
रोम-रोम, साँस-साँस कृष्ण-कृष्ण गावै छै।

पूजा के रौ काल, गंगाजल छिड़कैत काल
आरती करैत काल कृष्ण-कृष्ण गावै छै।
माला के गूथैत काल, चन्दन घिसैत काल
फूल चढ़वैत काल कृष्ण-कृष्ण गावै छै।
पान-परसाद आदि नैवेद काढ़ैत काल
हवन करैत काल कृष्ण-कृष्ण गावै छै।
वहै ब्रह्मवेता जौने जगत के काज करै
रोम-रोम, साँस-साँस कृष्ण-कृष्ण गावै छै।

धान के काटैत काल, पांति लगवैत काल
धेनु चरवैत काल कृष्ण-कृष्ण गावै छै।
खेत के जोतैत काल, बीज छिड़कैत काल
पानी पटवैत काल कृष्ण-कृष्ण गावै छै।
फसल काटैत काल, दउनी करैत काल
अन ओसवैत काल कृष्ण-कृष्ण गावै छै।
वहै ब्रह्मवेता जौने जगत के काज करै
रोम-रोम, साँस-साँस कृष्ण-कृष्ण गावै छै।