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गीत 3 / पन्द्रहवां अध्याय / अंगिका गीत गीता / विजेता मुद्‍गलपुरी

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नर के खोज करै के चाही
आदि पुरुष नारायण के ही शरण गहै के चाही।

जौन पुरुष के शरण पाय केॅ, लौटि जीव नै आवै
जौन पुरुष संसार वृक्ष के नित विस्तार बढ़ावै
तौन पुरुष पर दृढ़ मन राखी, मनन करै के चाही
नर के खोज करै के चाही।

जिनकर मोह-मान-मद मरलोॅ, आसक्ति जे जीतल
जे परमेश्वर में स्थिर भेॅ, सकल कामना जीतल
सँग-सँग दुख-सुख नाम द्वन्द्व से मुक्त हुऐ के चाही
नर के खोज करै के चाही।

से अविनाशी परम पुरुष के सहज रूप से पावै
सकल तमोगुण के जे प्राणी तन से दूर भगावै
सब आसक्ति त्यागि, नेम पर अटल रहै के चाही
नर के खोज करै के चाही।