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गीत 3 / सातवाँ अध्याय / अंगिका गीत गीता / विजेता मुद्‍गलपुरी

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मूल प्रकृति के आठ गिनावै
जीवन के संरचना केशव अर्जुन के समझावै।

धरती-जल-अग्नि-वायु-आकाश-अहहं-मन-बुद्धि
कहलन एकरोॅ दू प्रकार छै परा अेॅ-परा प्रकृति
हय आठो में पाँच प्रकृति जे पंचभूत कहलावै
मूल प्रकृति के आठ गिनावै।

मन-बुद्धि अरु अहंकार अन्तः के तत्त्व बतैलन
दस इन्द्रिय, पंच तन्मात्रा में पुनि आठ मिलैलन
फेर हुन्हीं अव्यक्त प्रकृति के तेइस भेद बतावै
मूल प्रकृति के आठ गिनावै।

चेतना रूपा परा प्रकृति छिक, अपरा जड़ कहलावै
व्यक्त प्रकृति के जगत नाम छिक, जीव रूप जे पावै
हे अर्जुन सम्पूर्ण भूत के हय दोनों उपजावै
मूल प्रकृति के आठ गिनावै।