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गीत 4 / सतरहवां अध्याय / अंगिका गीत गीता / विजेता मुद्‍गलपुरी

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आयु-बल-बुद्धि आरो अरोग्य बढ़ावै वाला
सुख उपजावै वाला सात्विक पुरुष छै।
रसदार जौने, नवनत सन चित्त वाला
स्थिर स्वभाव वाला सात्विक पुरुष छै।
मन नित दृढ़ राखै सात्विक स्वभाव वाला
हिय में संतोष वाला सात्विक पुरुष छै।
करुआ-खट्टा-लवन, बहुत गरम तीख
भोजन जे पावै से असात्विक पुरुष छै।

अधिक दाहक आरो अत्यधिक रुख-सुख
दोनों ही प्राणी के लेली दुख उपजावै छै।
चटकार भोजन राजस के रौ गुण छिक
भोजन के राहे जौने दुख के बोलावै छै।
अधपका-रसहीन-बसिया-दुर्गन्ध युक्त
एहनोॅ भोजन जे अपावन कहावै छै।
भोजन उछिष्ट-अपवित्र कहलावै वाला
तामसी पुरुष के जे अधिक सुहावै छै।