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गीत 7 / आठवाँ अध्याय / अंगिका गीत गीता / विजेता मुद्‍गलपुरी

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जे हमरा भजि हमरा पावै, पुनर्जन्म नै पावै
आन लोक के पावै से पुनि-पुनि धरती पर आवै।
जे हमरा जानै
ब्रह्मा के कालतत्त्व के जानै,
एक हजार चतुर्युगी
ब्रह्मा के एक दिन मानै,
ओतने दिन ऊ रात के मानै, योग पंथ अपनावै।
चार यगोॅ के जोग करी केॅ
दिव्य-युग कहवै छै,
दिव्य युग जे देवलोक के
एक युग कहवै छै,
मानव के रोॅ एक बरस देवोॅ के दिवस कहावै।
तीन सौ साठ बरस
देवोॅ के दिव्य वर्ष कहलावै
दिव्य वर्ष बारह हजार के
दिव्य युगोॅ कहलावै,
ब्रह्मा के दिन कल्प कहावै, रात प्रलय कहलावै।
तीस-तीस दिन-रात ऐसनों
ब्रह्मा के एक महीना,
ऐसी ना सौ वर्ष परै छै
ब्रह्मदेव के जीना,
हय अवधी के बाद त ब्रह्मा भी अनित्य कहलावै
जे हमरा भजि हमरा पावै, पुनर्जन्म नै पावै।