भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

गीत 8 / दशम अध्याय / अंगिका गीत गीता / विजेता मुद्‍गलपुरी

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

धेनु बीच हम कामधेनु छी।
घोड़ा में हम उच्चश्रवा छी, हाथी एरावत छी।

मानव में राजा हम छेकौं, सर्प वासुकी हम छी
हम मैथुनी जगत उत्पन्न के कारण काम-मदन छी
नागोॅ में हम शेष नाग छी, हम जलदेव वरुण छै
धेनु बीच हम कामधेनु छी।

पितर अर्यमा हमरा जानोॅ, शासक में हम यम छी
दैत्य राज प्रह्लाद हम्हीं, गणना में हम्हीं समय छी
पशु में हम मृगराज सिंह छी, खग में हम्हीं गरूड़ छी
धेनु बीच हम कामधेनु छी।

हम पवित्रत के कारण, वायु छी अर्जुन जानोॅ
शस्त्र धरि में राम हम्हीं, हमरा पुरुषोत्तम मानोॅ
नदी बीच भागीरथि गंगा, मीन में हम्हीं मगर छी
धेनु बीच हम कामधेनु छी।