भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

गुलमोहर ने... / रमेश तैलंग

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

देखो, देखो! देखो, देखो!
देखो, सारा आँगन,
गुलमोहर ने फूलों से
भर दिया हमारा आँगन।

यह आँगन, जो पड़ा हुआ था
सूखा-सूखा और मुरझाया,
उस पर गुलमोहर क्या फूला
कर दी मखमल-सी काया।
अम्माँ ने अब नाम दिया
इसको ‘फुलकारा आँगन’।

एक मौसम ने धूल उड़ाई,
एक ने छलकाई गगरी,
एक मौसम ने रंग भर दिए
जैसे जादू की नगरी,
ऐसे जादूगर मौसम से
हरदम हारा आँगन।