भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

गौरैया / उदय भान मिश्र

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

कितने अधिकार से
फुदकती है गौरैया!
घर में
आंगन में
छज्जे-मुंडेर पर

मेरा घर
अपना घर समझती है
गौरैया!

चहचहाती है गौरैया!
खिड़की से
झांकती है गौरैया!

घोंसलें बनाती है
गौरैया!
दाना चूगती हैं
चुगाती है
गौरैया!

दानें बिखेरता हूं
चुन-चुन कर खाती है
और
उड़-उड़ जाती है
गौरैया!
पास नहीं आती है
गौरैया!