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घरवा से इकसल जसोदा रानी, सुभ दिन सामन हे / मगही

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मगही लोकगीत   ♦   रचनाकार: अज्ञात

घरवा से इकसल[1] जसोदा रानी, सुभ दिन सामन[2] हे।
ललना, जमुना के इरि झिरि[3] पनियाँ सोहामन हे॥1॥
सात पाँच मिललन सँघतिया[4] से सोने घइला[5] माथे लेलन हे।
गावहिं मंगल गीत, देखत सुर मोहहिं हे॥2॥
केउ सखी मुँह धोवे, केउ सखी हँसि हँसि पानी भरे हे।
ललना, केउ एक पार तिरियवा कपसि[6] लोर[7] ढारइ हो॥3॥
नइ[8] हकइ[9] नावोड़िया[10] अउरो मलहवा भइया हे।
ललना, केहि विधि उतरब पार, तिरिया एक रोवइ हे॥4॥
बाँधि के काँछ कछौंटा[11] अउर छाती[12] घइला लेइ हे।
जाइ जुमल[13] जमुना पार, काहे गे तिरिया रोवहिं गे॥5॥
की[14] तोर नइहर[15] दूर कि सासुर[16] दुख पड़ल हे।
तिरिया, की तोर कंत बिदेस कवन दुख दुखित हे॥6॥
नइ मोरा नइहर दूर, न सासुर दुख पड़ल हे।
नइ मोरा कंत विदेश, कोख[17] दुख दुखित हे॥7॥
सात पुतर दइब[18] देलन, कंस सभ हर लेलन हे।
ललना, अठवें गरभ नगिचायल[19] सेकरो[20] भरोसा नइ हे॥8॥
चुप रहुँ, चुप रहुँ देवोकी, त सुनह बचन मोरा हे।
अपना बलक मोरा दींहऽ त हम पोस-पाल देबो हे॥9॥
नौन,[21] चाउर[22] तेल पइँचा[23] भेल, सभे, चीज पइँचा भेल हे।
कोखवा उधार नइ सुनली, कइसे धीरजा बाँधव हे॥10॥
किया[24] साखी[25] सुरजवा त किया साखी गंगा माता हे।
ललना, किया साखी सुरुज के जोत, धरम मोर साखी हथि हे॥11॥
हो गेल[26] कौल-करार[27] बचन हम पालब हे।
लाख देतन मोरा कंस तइयो[28] नई मानब हे॥12॥
आयल भादो के रात, किसुन[29] पख[30] अठमी हे।
लिहलन किसुन अवतार, सकल जग जानहु हे॥13॥
खुल गेल बजर केवाँड़, पहरु[31] सभ सूतल[32] हे।
देवोकी ले भागलन जसोदा के द्वार, महल उठे सोहर हे॥14॥
जो एहि मंगल गाबहिं गाइ सुनावहिं हे।
जलम-जलम[33] अहियात[34] पुतर फल पावहिं हे॥15॥

शब्दार्थ
  1. निकलीं
  2. श्रावण मास
  3. मन्द-मन्द झर-झर बहने वाला
  4. संगी-साथी
  5. घड़ा
  6. सिसक-सिसक कर
  7. अश्रु
  8. नहीं
  9. है
  10. छोटी डोंगी
  11. आँचल कमर में बाँधना, कच्छा कसना
  12. वक्ष-स्थल
  13. पहुँच गई
  14. क्या
  15. नैहर, मायका
  16. ससुराल
  17. कुक्षि, गर्भ
  18. दैव
  19. नजदीक हुआ
  20. उसका भी
  21. नमक, लवण
  22. चावल
  23. लौटा देने के लिए ली हुई वस्तु
  24. क्या
  25. साक्षी
  26. हो गया
  27. परस्पर वचनबद्धता, प्रतिज्ञा
  28. तब भी
  29. कृष्ण
  30. पक्ष, पखवारा
  31. पहरुवा, पहरेदार
  32. सोया हुआ, निद्रित
  33. जन्म-जन्म
  34. सौभाग्य। अहिबात-सं. अभिवाद?, अविधवात्व