भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

घरां पधारो सायबा / ओम पुरोहित कागद

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

तीनूं एकला
भेलप में
करै जातरा
भरै साख
जूण री।

एकली झील
एकली नाव
एकलो आदमी
पण
तीनूं
एकला कद!

अदीठ नै
दीठ में बांधण
भंवै माणस
मारै हेला
पण भूलै
किणी री दीठ
मगरां बंधी
उडावै कागला
घरां पधारो सायबा!