भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

घर्षिता है वीचिमाला... / कालिदास

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

मुखपृष्ठ  » रचनाकारों की सूची  » रचनाकार: कालिदास  » संग्रह: ऋतुसंहार‍
»  घर्षिता है वीचिमाला...
प्रिये ! आई शरद लो वर!

घर्षिता है वीचिमाला

मुखों से कारण्डवों के

तीर भू आकुल हुई

कलहंस और सारस कुलों से

कमल के मकरंद से

आरक्त शैविलिनी मनोहर

हंस रव से जन हृदय में

प्रीति को जाग्रत रही कर
प्रिये ! आई शरद लो वर!