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घोंसला बनाया / श्रीप्रसाद

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चिड़िया ने घोंसला बनाया
मेहनत की भारी
एक-एक कर तिनके लाई
चिड़िया बेचारी

सुंदर छोटा द्वार बनाया
गर्मी थी भीतर
वह घोंसला नहीं, चिड़िया का
था सुंदर-सा घर

चिड़ा और चिड़िया दोनों ने
मिलजुल मेहनत की
लेकिन दोनों में मेहनत थी
ज्यादा चिड़िया की

अंडे देने थे उसको ही
अंडे प्यारे से
अंडों से बच्चे आने थे
बड़े दुलारे से

कुछ दिन बाद आ गये अंडे
कोमल गोले से
बड़े नहीं थे और न छोटे
सिर्फ मझोले से

उनमें से दो बच्चे आये
छोटे छुईमुई
आँखें खुली थीं उनकी
करते कुईं-कुईं

चिड़िया उनको चुग्गा लाती
और खिलाती थी
बार-बार बाहर जाती थी
जल्दी आती थी

बच्चों ने आँखें भी खोलीं
पाँखें भी खोलीं
दोनों बच्चे मित्र बन गये
दोनों हमजोली

लगे बोलने चीं चीं चीं चीं
फिर बाहर आये
चिड़िया ने रहने, उड़ने के
सब गुण सिखलाये

जब बच्चों को उड़ना आया
चले गये उड़कर
छोड़ गई चिड़िया भी अपना
बना बनाया घर

यह चिड़िया ऐसा ही फिर
घोंसला बनायेगी
अंडे देगी, बच्चे पाकर
खुश हो जायेगी।