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चन्द्रमा का पलायन / ऑस्कर वाइल्ड / अनिल जनविजय

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सारी इन्द्रियों पे सुखदाई बेफ़िक्री पसर गई
और, छाई है एक स्वप्निल शान्ति चारों ओर
छायादार धरती पर ख़ामोशी का असर वही
बे-छाया भूमि पर गहरी चुप्पी, न कोई शोर

तीखी गूँज सुनाई देती है, पीड़ा भरे रुदन की
लगे ज्यों कोई उदास अकेला पंछी रो रहा है
ये दुखी आवाज़ है अन्नपुट पक्षी के क्रन्दन की
कुहरीली पहाड़ी पे अपनी प्रिया को टोह रहा है

वहाँ दूर आसमान में झलके हँसिये जैसा चाँद
अचानक छिप गया वो नभ में छा गया अन्धेरा
चेहरा ढक घुस गया यकायक वह किसी माँद
मुख पे कस लिया है उसने पीले घूँघट का घेरा

मूल अँग्रेज़ी से अनुवाद : अनिल जनविजय

लीजिए, अब यही कविता मूल अँग्रेज़ी में पढ़िए
La Fuite de la Lune

To outer senses there is peace,
A dreamy peace on either hand
Deep silence in the shadowy land,
Deep silence where the shadows cease.

Save for a cry that echoes shrill
From some lone bird disconsolate;
A corncrake calling to its mate;
The answer from the misty hill.

And suddenly the moon withdraws
Her sickle from the lightening skies,
And to her sombre cavern flies,
Wrapped in a veil of yellow gauze.