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चाँद को पाती / रेशमा हिंगोरानी

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एक तू ही है ग़मगुसार मेरा,
निभाया तूने सदा साथ मेरा,
मैं जब भी तन्हा दिखी हूँ तुझको,
तूने चुपके से थामा हाथ मेरा,

बरस रहा है नूर,
कतरा-कतरा बन के किरन,
तेरी ही नुक्रई शुआएँ,
ढाँपती हैं बदन,

तेरे शफ़्फ़ाफ़,
चमकते हुए,
नुक्कूश-ओ-दहाँ,
जिनसे आबाद
हो रहा है
फिर से
मेरा जहाँ,

तेरी बेलौस रौशनी में दमकता है समाँ,
तेरे बगैर है तीरा-ओ-तार सारा ज़माँ,

तू दामन-ए-शब,
तो रोज़ ही
रौशन कर दे,
मेरे आँगन में भी
इम्ररोज़ उजाला भर दे !

ऐ मेरे चाँद,
जा के फिर से
छुप गया है कहाँ,
पता बताए कोई,
अब के मैं ही जाऊँ वहाँ !

(15.02.95)