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चाँद यह सोने नहीं देता / नन्दकिशोर नवल

चाँद यह सोने नहीं देता
किया था मैंने कभी प्रेम
भूलकर सब नेम, योग-क्षेम
याद उसकी यह मुझे खोने नहीं देता
कान के आ पास जाता कूक
उठाता है कलेजे में हूक
किन्तु खुलकर यह मुझे रोने नहीं देता
प्राण-चूनर में लगा है दाग
आग में जल भस्म यह होने नहीं देता।