भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

चांउठि / मोहन गेहाणी

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

हिकु क़दमु अन्दर आयल शख़्स खे
ॿाहिर करे छॾे
ऐं ॿाहिरिएं खे अन्दर करे छॾे
तूं
दिल जी चांउठि मथां
झूलो ॿधी
झूलीन्दो रहीं
मूंखे कल ई न रही
तूं अन्दर आहीं या ॿाहिर!