भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

चार-चर्मकार / कुमार मुकुल

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

जन चार
भार (मृत मवेशी) लिए कंधों पर जा रहे
हिम्‍मत सबकी
हो रही तार-तार

मृत्‍यु का बोझ
हो रहा भार है
त्‍याग दें भार तो
जीना दुश्‍वार है।