भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

चिड़ियाँ / अंशु हर्ष

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

एक चिड़िया की काँटों भरी डगर
यूँ तो पँख है उस राह को पार करने को
लेकिन मन का एक तार जुड़ा है इस
डाल की राह से
मोह के धागे बंधे है
इस डाल के हर कोने से ...
सारा कुसूर उस सागर का है
जिसकी उफ़ान खाती हुई लहरों पे चल
एक दूसरी डाल आ कर रुकी थी
इसी नन्ही चिड़िया के लिए ...