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चिरैय्या खबरदार / आराधना शुक्ला

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शातिर हैं अब हवा के झोंके, कातिल बड़ी बयार
चिरैय्या खबरदार
नहीं घोसला रहा सुरक्षित, पिंजड़े में भी खतरा
कैसे जान सकेगी, किसका मन है कितना सुथरा
खंजर नीड़ के तिनके, काँटे पिंजड़े की दीवारें
हंसों के चेहरे में छिपती, नागों की फुफकारें
बाज़ तेरे हमदर्द बने हैं, गिद्ध हैं पहरेदार
चिरैय्या खबरदार
आसमान है मात्र भरम, ये सभी उड़ानें छल हैं
माना उड़ सकती है चिड़िया, पंखों में जो बल है
पर क्या होगा, जब उड़ान में पर नोचे जायेंगे
पीड़ित को ही नभ के स्वामी, दोषी बतलायेंगे
तलवार बना तू पंखों को, डैनों को कर हथियार
चिरैय्या खबरदार
आस लगाना किससे, क्या मझधार किनारा देंगे
राम स्वयं निर्वासित हैं, क्या तुझे सहारा देंगे
अतः तू अपनी रक्षा खुद कर, बहेलियों-जालों से
बाज़ों, गिद्धों से-जो ढँके हैं, हंसों की खालों से
साहिल तक पहुँचाएगी, बस हिम्मत की पतवार
चिरैय्या खबरदार