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छीछाल्यादरि / पढ़ीस

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तुम घूरि-घूरि हमका द्याखउ, यह छीछाल्यादरि द्याखउ तउ!
हम तुका, द्याखति धरि खायी, यह छीछाल्यादरि द्याखउ तउ।
तुम ल्यहँगा लखतयि लाल परउ, लंबे लटकन[1] की कउनि कही,
हम सूटू-बूटु से जरि जायी, छीछाल्यादरि द्याखउ तउ।
तुम पूरि प्वँगहरा[2] नोचि-नोचि, फिरि पानी पियउ बरण्डी[3] का,
हम हन गुरूमुख, कंठी बाँधे यह छीछाल्यादरि द्याखउ तउ।
तुम जंटर मैनी मेम चहउ, जो चटर-पटर तुमते ब्वालयि,
हम काढ़ी घुँघटु ड्यढ़हत्था, यह छीछाल्यादरि द्याखउ तउ।
होटल की नचुई देखि-देखि, तुमका नचनची सवार होयि,
हम मनई देखि भरकि भाजी, यह छीछाल्यादरि द्याखउ तउ।
हम गजल-पचासा गायी, तब तुम टुन-टुन करउ पियानू[4] पर,
यह अँधरा-बहिरा केरि द्यवाई, यह छीछाल्यादरि द्याखउ तउ।
तुम देसी देखे खारू खाउ, हम परदेसी पर उकिलायी,
यहु कस दुलहा? यह कसि दुलहिनि? सबु छीछाल्यादरि द्याखउ तउ॥

शब्दार्थ
  1. होठों को स्पर्श करते हुए नाकमें पहना जाने वाला गहना
  2. पूरी टाँग
  3. ब्राण्डी-रशे का पेय-बिलायती शराब
  4. वाद्य यन्त्र प्यानों