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जग से जो नहीं हारा संतान से हारा है / कैलाश झा ‘किंकर’

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जग से जो नहीं हारा संतान से हारा है
दिन शाहजहाँ ने भी मुश्किल में गुज़ारा है।

दुनिया में सभी जीते ख़ुद के ही भरोसे पर
मैंने तो किया तुमको पग-पग पर इशारा है।

सब छोड़ गये हैं अब वीरान हुई दुनिया
हिम्मत तो रखो साथी कुदरत का सहारा है।

परदेश नहीं जाओ कुछ काम यहीं ढूँढ़ो
कितनों ने यहीं रहकर ख़ुद को भी सँवारा है।

अरमान नहीं खिलता आलस के पुजारी का
संघर्ष किया जिसने नभ का वह सितारा है।

सुनसान हवेली में कोई न कहीं दिखता
सौ बार यहाँ आकर किंकर ने पुकारा है।