जनता कि सेवा में जाने कितना दूध-दही।
लिखो लाभ का पूरा ब्योरा, छोटी पड़े बही।
तीन साल में तीस गुना धन,
सब भौचक्के हैं।
ताक-झाँक करते फिरते जो,
चोर-उचक्के हैं।
करें विरोध
कहें नेता जी है परवाह नहीं॥
बना रहे जन-तंत्र और
यह जनता बनी रहे।
माया-मोह न छूटे इसका,
प्रण की धनी रहे।
कोर-कसर पूरी कर लेंगे
आगे रही-सही।
यह कलयुग की कामधेनु
जो माँगो देती है।
मन में करो कामना,
यह पूरी कर देती है।
इसके जैसा दाता-दानी,
कोई और नहीं॥