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जब तुम्हारे प्यार में रुसवाइयाँ देखी गई / चेतन दुबे 'अनिल'

जब तुम्हारे प्यार में रुसवाइयाँ देखी गई।
ज़िन्दगी में तब मेरी तन्हाइयाँ देखी गई।

देखकर मुखड़ा तुम्हारा खिल गया मन का सुमन -
जब तुम्हारे हुस्न की रानाइयाँ देखी गई।

जब हमारे पाँव मोहब्बत की डगर पर बढ़ गए -
तब हमारे रास्ते में खाइयाँ देखी गई।

बिन तुम्हारे इस जहाँ में अब नहीं लगता है दिल -
जब तुम्हारे गाँव में पुरवाइयाँ देखी गई।

मैं तुम्हारे बिन सुनयने! शून्य बनकर रह गया-
पर तुम्हारी ज़िन्दगी में दहाइयाँ देखी गई।

मैं तो वैसे भी तुम्हारा था, तुम्हारा ही रहा-
फिर भी मेरे दिल की कुछ गहराइयाँ देखी गई।

जब तुम्हारा हुस्न मेरे जेह्न पर हावी हुआ -
तब तुम्हारे द्वार पर शहनाइयाँ देखीगई।

मैं तेरी महफिल से उस दिन उठ गया जानेजहाँ!
जबकि तेरे जिस्म की अँगड़ाइयाँ देखी गई।

गुफ्तगू करने को तुझसे दिल बहुत बेचैन है -
जब से बिस्तर पर तेरी परछाइयाँ देखी गई।