भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

जमजम चाहे गंगाजल / जौहर शफियाबादी

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

जमजम चाहे गंगाजल,
बैरी ह दूनू के छल
रहिया राहता देख के चल
मोह के महकल बा जंगल
साँच बखानत चूक भइल बा
मन में बा हलचल-हलचल
रउआ जिहीं लाख बरीस
हमरा खातिर पल-द पल
हम मरुथल के चान झुराइल
तू रसवन्ती ताजमहल
भोजपुरी में हमरो बाटे
गलिब जइसन चोख गजल
नेह नयन से नाता जोड़
छोड़ ‘जौहर’ दल दलदल