भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

जलम : अेक / विरेन्द्र कुमार ढुंढाडा़

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

जलम म्हारो
मायतां रै हेत
बाजी थाळी
बंट्या लाडू
गइज्या गीत
मा हरखी
जाणै
मिलगी जीत
जीसा री मूंछ
होई ऊंची
भायां री चिंता
सांभी अंटी
पंपोळी कूंची
अब बंटसी
लाड अर लिछमी।

आज बंटग्यो घर
जकै रो
जलम री बगत
जाबक नी हो डर।