भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

जामुन चूती है / हरिवंशराय बच्चन

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज


अब गाँवों में घर-घर शोर

कि जामुन चूती है।


सावन में बदली

अंबर में मचली,

भीगी-भीगी होती भोर

कि जामुन चूती है।

अब गाँवों में घर-घर शोर

कि जामुन चूती है।


मधु की पिटारी

भौंरे सी कारी,

बागों में पैठें न चोर

कि जामुन चूती है।

अब गाँवों में घर-घर शोर

कि जामुन चूती है।


झुक-झुक बिने जा,

सौ-सौ गिने जा,

क्‍या है कमर में न ज़ोर

कि जामुन चूती है?

अब गाँवों में घर-घर शोर

कि जामुन चूती है।


डालों पे चढ़कर,

हिम्‍मत से बढ़कर,

मेरे बीरन, झकझोर

कि जामुन चूती है।

अब गाँवों में घर-घर शोर

कि जामुन चूती है।


रस के कटोरे

दुनिया के बटोरे,

रस बरसे सब ओर

कि जामुन चूती है।

अब गाँवों में घर-घर शोर

कि जामुन चूती है।