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जीवन के निर्माण का हर औज़ार है इनके बस्ते में / पवनेन्द्र पवन

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जीवन के निर्माण का हर औज़ार है इनके बस्ते में
पुस्तक, कापी पैमाना, कलम, परकार है इनके बस्ते में

रॉकेट, बंगला टी.वी. गाड़ी कार है इनके बस्ते में
इनकी पहुँच से दूर बहुत बाज़ार है इनके बस्ते में

इनको बौना रखने कोई साज़िश लगती है हमको
इनके भार से भी ज़्यादा जो भार है इनके बस्ते में

यह भीतर पाया न पहुँच और वो बाहर तक आ न सकी
प्रशासन दरवाज़े पर, सरकार है इनके बस्ते में

भूख, ग़रीबी ,आगज़नी को देख `पवन' यूँ लगता है
जो कुछ भी है माल भरा , बेकार है इनके बस्ते में