Last modified on 7 सितम्बर 2018, at 01:15

जीव / ककबा करैए प्रेम / निशाकर

माली फुलवाड़ीकें तकैत छै
भौंरा फूलकें
मरद स्त्रीकें तकैत छै
माय बेदराकें
किसान फसिलकें तकैत छै
पशु चाराकें
चकोर चानकें तकैत छै
बेंग बरखाकें
कवि कविताकें तकैत छै
फनिगा आगिकें।

जहिया धरि रहतैक
सृष्टि
सुष्टिमे जीव
जीवमे
बाँचल रहतैक
जिजीविषा
ताका-हेरी करैत रहत जीव।