भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

जेकरा पर तू गरब करेलऽ आपन ना ऊ आउर ह / रामरक्षा मिश्र विमल

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

जेकरा पर तू गरब करेलऽ आपन ना ऊ आउर ह
चतुर रहे दुशमन तs नीमन बुरबक बेटो बाउर ह

आपन के एहसास करवलऽ सब बिशवास लुटा दिहलीं
दूध कहाँ बा ? मड़गिलवे के रटले बाड़ऽ जाउर ह

केकरा के आपन आ केकरा के अब आन कहीं भइया
अमिरित के खोजे में नीके चमकेला ऊ माहुर ह

ताजा कहिके पाँत बिगारल छोड़ीं ए शूकुल बाबा
दू दिन पर मीलल भोजन ई दूबे के बसियाउर ह