भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
  रंगोली
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार
Roman

जेहि बन सीकियो न डोलइ, बाघ गुजरए हे / मगही

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

मगही लोकगीत   ♦   रचनाकार: अज्ञात

जेहि बन सीकियो[1] न डोलइ,[2] बाघ गुजरए[3] हे।
ललना, ताहीतर रोवे सीता सुन्दर, गरभ अलसायल[4] हे॥1॥
रोवथी सीता अछन[5] सँय, अउरो छछन[6] सँय हे।
ललना, के मोरा आगे-पाछे[7] बइठतन, के[8] रे सिखावत[9] हे॥2॥
बन में से इकसलन[10] बनसपति,[11] सीता समुझावल हे।
ललना, सीता हम तोरा आगे-पाछे बइठब, केसिया सँभारब[12] हे॥3॥
हम देबो सोने के हँसुअवा,[13] हमहीं होयवो डगरिन हे॥4॥
आधी रात बीतलइ पहर रात, बबुआ जलम लेल हे।
ललना, जलमल तिरभुवन नाथ, तीनहुँ लोक ठाकुर हे॥5॥
जलम लेहल बाबू अजीधेया त अउरो रजधानी लेत हे।
बाबू जीरवा[14] के बोरसी[15] भरयतूं,[16] लौंगिया पासँध देती हे॥6॥
जलमल ओही कुंजन बन अउरो सिरीस बन हे।
बबुआ, कुसवे[17] ओढ़त[18] कुस बासन[19] कुसवे के डासन[20] हे॥7॥
अँचरा फारिय[21] के कगजा, कजरा[22] सियाही भेल हे।
ललना, कुसवे बनइली[23] कलमिया, लोचन[24] पहुँचावहु हे॥8॥
पहिला लोचन रानी कोसिला, दोसर केकइ रानी हे।
ललना तेसर लोचन लहुरा[25] देवर, रामहिं जनि जानहि हे॥9॥
चारी चौखंड[26] के पोखरिया, राम दँतवन करे हे।
ललना, जाइ पहुँचल उहाँ[27] नउआ, त कहि के सुनावल हे॥10॥
कोसिलाजी देलन पाँचों टुक[28] जोड़वा,[29] केकई रानी अभरन हे।
ललना, लछुमन देलन मुंदरिया,[30] रामजी पटुका[31] देलन हे॥11॥
कहले सुनल सीता माँफ करिह, अजोधेया चलि आवह हे।
फटतइ[32] धरतिया समायब,[33] अजोधेया नहीं आयब हे॥12॥

शब्दार्थ
  1. सींक भी
  2. डोलती है
  3. गुजरते हैं, चलते-फिरते हैं
  4. श्लथ, आलस्ययुक्त
  5. अछन-छछन = प्रधीर हो-होकर
  6. प्रधीर हो-होकर
  7. आगे पीछे। पुत्रोत्पति के समय प्रसूता के आगे-पीछे बैठकर स्त्रियाँ सँभालती हैं।
  8. कौन
  9. शिक्षा देगी अथवा ढाढ़स बँधायेगी
  10. निकली
  11. वनदेवी
  12. सँवारूँगी
  13. नाल काटने वाला हँसुआ
  14. जीरा, मसाला
  15. गोरसी
  16. भराती
  17. कुश ही
  18. ओढ़ना
  19. वस्त्र पहनावा
  20. बिछौना
  21. फाड़कर
  22. आँखों का काजल
  23. बनाई
  24. सन्तान के जन्म होने के बाद नापित या कोई अन्य सन्देशवाहक हलदी, दूब, गुड़, अदरख और आम के पल्लव - इन मांगलिक द्रव्यों के साथ जन्म का शुभ संवाद देने के लिए सम्बन्धियांे के यहाँ भेजा जाता है। इसी को ‘लोचन पहुँचावल’ या ‘लोचन भेजल’ कहा जाता है।
  25. लाड़ला
  26. चार खण्ड
  27. उस जगह
  28. पाँचों टुक = वस्त्र के पाँच टुकड़, खण्ड स्तोक। धोती, कुर्ता, टोपी, गमछी और चादर, इन पाँचों को ‘पाँचांे टुक’ कहा जाता है।
  29. जोड़ा
  30. मुद्रिका, अँगूठी
  31. रेशमी वस्त्र
  32. फटती
  33. समा जाऊँगी, प्रवेश कर जाऊँगी