(राग प्रदीप-ताल कहरवा)
जो कुछ खाओ, यज्ञ हवन जो करो, करो जो कुछ तुम दान।
जो तप करो, करो या कुछ भी, अर्पण करो मुझे सह-मान॥
मैं स्वीकार करूँगा सभी तुम्हारा समुद स्वयं भगवान।
मुक्त शुभाशुभ कर्म-बन्धसे हो, तुम पाओगे कल्यान॥
(राग प्रदीप-ताल कहरवा)
जो कुछ खाओ, यज्ञ हवन जो करो, करो जो कुछ तुम दान।
जो तप करो, करो या कुछ भी, अर्पण करो मुझे सह-मान॥
मैं स्वीकार करूँगा सभी तुम्हारा समुद स्वयं भगवान।
मुक्त शुभाशुभ कर्म-बन्धसे हो, तुम पाओगे कल्यान॥