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जो ग़रीब का ख़ून चूसती वह सरकार निकम्मी है / डी. एम. मिश्र

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जो ग़रीब का ख़ून चूसती वह सरकार निकम्मी है
कमज़ोरों की मदद न करती वह सरकार निकम्मी है

कैसा लोकतंत्र है जिसमें जनता भूखी सोती हो
सत्ता के जो मद में रहती वह सरकार निकम्मी है

मंगल, चन्द्र, बृहस्पति पर जाने की बातें बेमानी
झोपड़ियों तक पहुँच न सकती वह सरकार निकम्मी है

टैक्स वसूले, भरे तिजोरी, भष्टाचार में लिप्त रहे
जनता का जो शोषण करती वह सरकार निकम्मी है

पिछले वादे हुए न पूरे होने लगे नये वादे
जनता से जो झूठ बोलती वह सरकार निकम्मी है

तेरा पर्दाफ़ाश हो चुका बंद भी कर जुमलेबाजी
आँखों में जो धूल झोंकती वह सरकार निकम्मी है

रोटी माँगो लाठी खाओ ऐसी तानाशाही हो
जिसके डर से काँपे धरती वह सरकार निकम्मी है

ग्राम सभा से लोकसभा तक देखो खेल सियासत का
कानी कुतिया थू- थू करती वह सरकार निकम्मी है

फिर ऐसी आँधी आती है सिंहासन हिल उठते हैं
जनता जब यह कहने लगती वह सरकार निकम्मी है