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जो चेत रहा सो जीत गया / उर्मिल सत्यभूषण

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जो बीत गया सो बीत गया
तू उसकी सुध बिसरा पगले।
उठ गा भविष्य का गीत नया
जो चला गया वो था सपना
जो आने वाला है अपना
बीते अवसर पर रोना क्या
आने वाला कल खोना क्या
जो खोया सुधि में, हार गया
जो चेत रहा सो जीत गया
तू नयन न कर गीले गाले
सुधियों के बंधन कर ढीले
प्रेरक स्फुलिंग मगर चुन ले
खाली जीवन घट फिर भर ले
जो भरा हुआ था रीत गया।