भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

झीमी-झीमी बूनी बरिसावेले बदरिया / रामरक्षा मिश्र विमल

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

झीमी-झीमी बूनी बरिसावेले बदरिया
लागेला नीक ना।
हँसे सगरी बधरिया लागेला नीक ना।

सरग बहावेला पिरितिया के नदिया
छींटे असमनवा से चनवा हरदिया
धरती पहिरि लिहली हरियर चुनरिया
लागेला नीक ना।
नील रंग के किनरिया लागेला नीक ना।

बरिसि-बरिसि घन पात-पात धोवे
कवि आ रसिक सभ सुध-बुध खोवे
झूमि-झूमि गावेलिन झूमर सभ सुंदरिया
लागेला नीक ना।
चले देली ना डगरिया लागेला नीक ना।

नाचे लगले मोरवा मोरिनिया के संगवा
मनवा गोताए लागल नेहिया के रंगवा
गगन मगन भइले झरली फुहरिया
लागेला नीक ना।
देखि छबि के बजरिया लागेला नीक ना।

अवते सवनवा ना होखे के मगनवा
खनकि-खनकि उठे गोरी के कंगनवा
फाटि जाले बदरी के मन के अन्हरिया
लागेला नीक ना।
खुले प्रीत के डगरिया लागेला नीक ना।