भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

डर का भूत / रमेश तैलंग

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

डर का भूत
निडर के आगे,
टिके न, भागे।

सोलह आने सच्ची-सच्ची
बात है भैया।
डरपोकों की दुनिया में बस
रात है भैया।
उस दुनिया में
लाल सवेरा
कभी न जागे।

जिसकी मुट्ठी में रहता
हिम्मत का मोती।
उसकी किस्मत नहीं
किसी ने देखी रोती।
मेहनत वाला
कभी किसी से
कुछ न माँगे।