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डांखळा 4 / विद्यासागर शर्मा

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(10)
चांदपोल बाजार हो'र दफ्तर जांतो 'बंटो'
भीड़ मांय फंस जातो, निकलण रो हो टंटो
पहुंचण खातर 'क्विक'
बरती एक 'ट्रिक'
स्कूटर उपर बांध लिंधो फायर ब्रिगेड रो घंटो।

(11)
मजिस्टे्रट रै औधे स्यूं रिटायर होयो 'झम्मन'
अपराधियां रो आखै जीवन कर्योड़ो हो दम्मन
मा री ही पगड़ी
चोट करी तगड़ी
सोक संदेश री जिग्यां, भेज दिंध्या 'सम्मन'।

(12)
आछी तरियां रोटी ढक'र राधा दफ्तर जांवती
लारै स्यूं बिलड़ी आ'र रोज-रोज खांवती
होगी जणा तंग
सोच्यो नयो ढंग
आती बरियां कम्प्यूटर में फीड कर'र आंवती।