भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

तुम्ही हो माता पिता तुम्ही हो / भजन

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

तुम्ही हो माता पिता तुम्ही हो तुम्ही हो बंधु सखा तुम्ही हो॥

तुम्ही हो साथी तुम्ही सहारे कोई न अपना सिवा तुम्हारे।
तुम्ही हो नैय्या तुम्ही खेवैय्या तुम्ही हो बंधु सखा तुम्ही हो॥

जो कल खिलेंगे वो फूल हम हैं तुम्हारे चरणों की धूल हम हैं।
दया की दृष्टि सदा ही रखना तुम्ही हो बंधु सखा तुम्ही हो॥