भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

तुम खाँ देखौ भौत दिनन में / ईसुरी

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

तुम खाँ देखौ भौत दिनन में।
अबलाखा ती मन में।
हमरी तुमरी प्रीत पुरानी।
छूटी वाला पन में।
दरसन दियौ न्यारे परकें,
छिप जिन जाव सकन में
हम तुम इक संगे खेले हैं।
मथुरा बिन्द्रावन में।
भली करा दई भेंट ईसुरी,
विध नैं येइ जनम में।