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तू नईं आई / कृष्ण वृहस्पति
Kavita Kosh से
बीं दिन दोपारां
तूं छोडया'ई
म्हारै बिस्तरां मांय
एक नानो सो सुपनों।
बीं स्यूं पै'ली भी
अेकर
तूं भूलगी ही
तावल्यां मांय
कान रो झूमको।
म्हैं जाणै हो
कै तू आसी पाछी
बीं झूमकै दाई लैंवण नै
ओ सुपनो बी।
ठाह ई नीं
कित्ता बरस बीतग्या
म्हैं अर तेरो सुपनों
जौवां हा बाट
तेरै पाछै आवण री।