भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

तोर हीरा हिराइल बा किचड़े में / कबीर

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

तोर हीरा हिराइल बा किचड़े में॥टेक॥
कोई ढूँढै़ पूरब कोई ढूँढ़े पश्चिम, कोई ढूँढ़े पानी पथरे में॥1॥
सुर नर मुनि अरु पीर औलिया, सब भूलल बाड़ैं नखरे में॥2॥
दास कबीर ये हीरा को परखैं, बाँधि लिहलैं जतन से अचरे में॥3॥