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दग़िस्तानी लोरी - 5 / रसूल हम्ज़ातव / मदनलाल मधु

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रेवड़ तीन अगर भेजोगे भेड़ों के
नहीं भौंह तक बेटी की तुमको दूँगी ।

तीन थैलियाँ सोने की यदि भेजोगे
नहीं गाल तक बेटी का तुमको दूँगी ।

तीन थैलियों के बदले में मैं तुमको
नहीं गाल का गुल तक बेटी का दूँगी ।

काले कौवे को मैं उसे नहीं सौंपूँगी
और दयालु मोर न मैं उसको दूँगी ।

अरी तीतरी तुम मेरी !
नन्ही-सी सारस मेरी !


रूसी भाषा से अनुवाद : मदनलाल मधु