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दयानन्द कहलाया था / रोहित आर्य

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वह आया हमें जिलाने को, ईश्वर से हमें मिलाने को,
पावन वेदों के अमृत को, आया था हमें पिलाने को।
दुनियाँ भर के पाखण्डों से, वह एक शेर टकराया था,
हम सबका रक्षक वह योद्धा, ही दयानन्द कहलाया था॥1॥
वह आया हमें...
माँ अमृत बा और कर्षन जी, का पुत्र बहुत ही प्यारा था,
था नाम मूलशंकर उसका, दिमाग चलता जी न्यारा था।
चूहे दौड़े शिव के ऊपर, देखा तो व्रत को तोड़ दिया,
सच्चे शंकर को पाने को, उसने अपना घर छोड़ दिया।
पाने को सच्चा ज्ञान यहाँ, दण्डी को गुरु बनाया था।
हम सबका रक्षक वह योद्धा, ही दयानन्द कहलाया था॥2॥
वह आया हमें...
दक्षिणा के बदले ऋषिवर से, गुरुवर ने माँग लिया जीवन,
होकर प्रसन्न मेरे ऋषि ने, अर्पित कर दिया उन्हें तन-मन,
फिर निकल पड़ा वह भारत का, खोया गौरव लौटाने को,
सब ढोंग और आडम्बर के, पाखण्डों का गढ़ ढाने को।
पाखण्ड खण्डिनी विजय पताका, को उसने फहराया था,
हम सबका रक्षक वह योद्धा, ही दयानन्द कहलाया था॥3॥
वह आया हमें...
इस पावन वैदिक संस्कृति का, जिसने भी किया तमाशा था,
उन सब दुष्टों के मुखड़े पर, ऋषिवर ने जड़ा तमाचा था।
सब पण्डे और मौलवी भी, उसके कारण भय खाते थे,
सब धूर्त, नीच और पाखण्डी, मेरे ऋषि से थर्राते थे।
प्रतिमा और कब्रों की पूजा, को उसने बन्द कराया था,
हम सबका रक्षक वह योद्धा, ही दयानन्द कहलाया था॥4॥
वह आया हमें...
जो मुल्ले और पादरी जन, जनता को मूर्ख बनाते थे,
उनकी बातों में आ हिन्दू, निज धर्म छोड़ते जाते थे।
वापस ला आर्य बना करके, हम सब पर था उपकार किया,
उन मुल्लों और पादरी पर, ऋषिवर ने भीषण वार किया।
सबसे पहले मेरे ऋषि ने, दलितों को गले लगाया था,
हम सबका रक्षक वह योद्धा, ही दयानन्द कहलाया था॥5॥
वह आया हमें...
नारी को पढ़ने-लिखने का, अधिकार यहाँ न मिलता था,
नारी के पढ़-लिख जाने से, पुरुषों का शासन हिलता था।
जिस नारी को बोला करते, यह तो पैरों की जूती है,
ऋषिवर के कारण से उसकी, हर तरफ बोलती तूती है।
नारी निर्माता होती है, ऋषिवर ने नाद सुनाया था,
हम सबका रक्षक वह योद्धा, ही दयानन्द कहलाया था॥6॥
वह आया हमें...
रहना परतन्त्र न अच्छा है, ऋषिवर ने बात चलाई थी,
भारत की सोई जनता में, एक चिंगारी सुलगाई थी।
अपना ही राज्य सर्वोत्तम है, ऋषिवर ने यह उद्घोष किया,
जिसको सुनकर के वीरों ने, था इंकलाब का घोष किया।
उस ऋषिवर के ही शिष्यों ने, भारत आज़ाद कराया था,
हम सबका रक्षक वह योद्धा, ही दयानन्द कहलाया था॥7॥
वह आया हमें...
इस दुनियाँ ने उसके ऊपर, ईंटें और पत्थर बरसाए,
फेंके उस पर विषधर काले, विष देकर उसको हर्षाए,
लेकिन मेरा प्यारा ऋषिवर, बस दयानन्द बन कर जीया,
हमको अमृत बाँटा केवल, खुद ने जीवन भर जहर पीया।
अपने हर इक हत्यारे को, ऋषिवर ने क्षमा कराया था,
हम सबका रक्षक वह योद्धा, ही दयानन्द कहलाया था॥8॥
वह आया हमें...
श्रीराम-कृष्ण के बेटों को, वह आया यहाँ बचाने को,
हम जिसको खोए बैठे थे, सम्मान हमें दिलवाने को।
"सत्यार्थ प्रकाश" दिया उसने, पावन वेदों का ज्ञान दिया,
और "आर्य समाज" बना करके, हम सबको नया विहान दिया,
 "रोहित" मेरे प्यारे ऋषि ने, भारत का भाग्य जगाया था,
हम सबका रक्षक वह योद्धा, ही दयानन्द कहलाया था॥9॥
वह आया हमें...