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दिल हमारा मोहब्बत का आदी है बस / ओम प्रकाश नदीम

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दिल हमारा मोहब्बत का आदी है बस
अपनी इतनी ही तारीफ़ काफ़ी है बस

पास का कुछ सुनाई नहीं दे रहा
दूर से एक आवाज़ आती है बस

दिल के जंगल में अब कोई हलचल नहीं
बेख़ुदी की हवा सरसराती है बस

कितनी सूनी है लाहौर दिल्ली सड़क
एक बस जाती है एक आती है बस

मुस्कुराने की हद तक तो आ ही गए
अब हँसी तक पहुँचना ही बाक़ी है बस

और भी एक दुनिया है जिसमें ’नदीम’
एक मैं और एक मेरा साथी है बस