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देशो के आजादी के भी होतै कोनो अर्थ लेकिन / अनिल शंकर झा

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देशो के आजादी के भी होतै कोनो अर्थ लेकिन
हमरा तेॅ तोरा सें बस एतना ही कहै के।
झूठ बेईमान केॅ तेॅ सब सुख भोग आरो
आम आदमी केॅ सब चुपचाप सहै के।
पूँजीपति जोंक बनी गरीबोॅ के खून चूसेॅ
गरीबोॅ केॅ जोंक केॅ भी सहलैर्थे रहे के।
आजादी के गानोॅ केॅ भजन नाकि दिनरात
किली जुली एक साथ गली कुची गाबेॅ के॥