भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
दौड़ / सांवर दइया
Kavita Kosh से
हिन्दी शब्दों के अर्थ उपलब्ध हैं। शब्द पर डबल क्लिक करें। अन्य शब्दों पर कार्य जारी है।
आं बुझतै खीरां में
फूंक
ना तूं मार सकै
अर ना म्हैं
आपणी स्सा दौड़
रोटी सूं लेय’र
लुगाई रै डील तांई है
इणी खातर कैवूं-
ओ अफसोस फालतू है कै
आं खीरां सूं
लाटा कद उठैला ?