भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

धार्मिक विचारों को लेकर / शहंशाह आलम

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

वो साधु थे और कहाँ-कहाँ से

नहीं आए थे


वो मौलवी थे और न मालूम

कितने धूल-धक्कड़ खाकर इकट्ठे हुए थे


दोनों ने कहा बिल्कुल निरापद

न्यायाधीश की तरह :

धर्मयुद्ध की समप्ति के बाद

हमीं तो बचेंगे

हमीं तो भोगेंगे

तमाम आसाइशें


धर्मयुद्ध में मारे जाएंगे

सारे भक्तगण