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ध्यान घनश्याम का दीवाना बना देता है / बिन्दु जी

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ध्यान घनश्याम का दीवाना बना देता है,
बागे दुनिया को भी वीराना बना देता है।
बिहार साँवले सरकार का मेरे दिल को,
कभी गोकुल कभी बरसना बना देता है।
शमाए इश्क ने तेरे यूं दिल को किया रोशन,
दीनों दुखियों को परवाना बना देता है।
बुतपरस्ती का कड़ा शौक इसे कहते हैं,
सिर जहाँ झुकता है बुतखाना बना देता है।
प्रेम-प्याले जो पीयें भरके वो अपनी जाने।
‘बिन्दु’ को बिन्दु ही मस्ताना बना देता है।