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नजरिया जोरे जुरै चित फोरे / बघेली

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बघेली लोकगीत   ♦   रचनाकार: अज्ञात

नजरिया जोरे जुरै चित फोरे बड़ा दुःख होय
अरे ओ प्यारे तोरे कारने कि होइ चिल्हिया मड़रांव
कहौ तो छतिया लगि रहौ कि लै उड़ि जाउँ अकाश
नजरिया जोरे जुरै चित फोरे बड़ा दुःख होय