भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

नज़र सरशार उसकी / नसीम अजमल

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

मनचंदा बानी के नाम

नज़र सरशार[1] उसकी ।
फ़ज़ा बेदार[2] उसकी ।

बहोत बातें सुनी हैं
सर-ए-बाज़ार उसकी ।

कहाँ कटता मेरा सर
मगर तलवार उसकी ।

मैं छोटा सा नगीना
बड़ी बाज़ार उसकी ।

हवा उसका तकल्लुम[3]
शफ़क दस्तार[4] उसकी ।

सुनी है मैंने आहट
हज़ारों बार उसकी ।

कहानी कह रही है
निगाह-ए-यार[5] उसकी ।

नज़र आई वो सूरत
गिरी दीवार उसकी ।

फ़ज़ा इक शबनमी सी
बदन के पार उसकी ।

यहाँ क्या मैं नहीं हूँ ?
ये सब पैकार[6] उसकी

अजब हम्द-ओ-सना[7] है
सुख़न के पार उसकी ।

दिखा दे कोई 'अजमल'
झलक इक बार उसकी

शब्दार्थ
  1. नशे में डूबी हुई
  2. जागती हुई
  3. बातचीत
  4. पगड़ी
  5. महबूब कि दृष्टि
  6. लड़ाई
  7. तारीफ़