भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
  काव्य मोती
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

नाजायज़ फेंके हुए बच्चों की तरह / एन. मनोहर प्रसाद

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

दलित सदैव रहे
नाजायज़ फेंके हुए बच्चों की तरह
पूरी क़ौम से उपेक्षित
समूचे समाज से परित्यक्त
सभी धर्मों द्वारा शोषित
राजसत्ता द्वारा विस्मृत
दलितों को दिए गये ज़ख़्म
छोड़ दिया गया उन्हें बेसहारा
ख़ुद ही करने को अपनी मरहम-पट्टी

अब हमारे बीच आयी हैं
सौम्य रूप में कार्यरत
सम्भ्रान्त स्वैच्छिक संस्थाएँ
जो दूसरों द्वारा होती हैं संचालित—
हमारे नाम पर,
ताकि वह खा सकें उसका फल
रसदार गूदा
और हमारे लिए छोड़ दें
गुठली और छिलके
यह कहते हुए कि
'फलों का सबसे पौष्टिक तत्त्व इन्हीं में है।'